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विज्ञान ने खोला रहस्य मनुष्य में होती है तीसरी आँख

5-Apr-17 07:54विज्ञान ने खोला रहस्य मनुष्य में होती है तीसरी आँख
विज्ञान ने खोला रहस्य मनुष्य में होती है तीसरी आँख

भगवान शिव सबकी मनोकामना पूरी करने के साथ ही विनाश करने वाले देवता भी माने जाते है। उनके हाथ में एक त्रिशूल होता है। इस त्रिशूल में तीन शक्तिशाली शक्तियों का वास होता है जो इच्छाशक्ति, कर्म और बुध्दि मानी जाती है। भगवान शिव के मस्तक के मध्य में तीसरी आँख भी होती है। माना जाता है कि जब भोलेनाथ क्रोधित होते हैं तब अपनी तीसरी आँख खोलती है और अपराधी का विनाश कर देते हैं। भगवान शिव की तीसरी आँख होने का यह कारण नही है और भी कारण आइए जानते हैं।

अपनी तीसरी आँख से भी देख सकते है भोलेनाथ

शास्त्रों में लिखा है कि जब उनकी तीसरी आँख खुलती है तो इससे बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा का संचार होता है।

आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र होती है तीसरी आँख

एशिया और भारत की कई अन्य संस्क्रतियों में भी तीसरी आँख को मान्यता दी गयी है। आध्यात्मिक शक्ति के अलावा इसे आलौकिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।

आपको क्या लगता है यह सिर्फ देवताओं में ही होती है इंसानों से भी इनका कोई नाता नही?

Pineal ग्लैंड को माना जाता है तीसरी आँख का प्रतीक

मनुष्यों में तीसरी आँख होती है या नहीं इस बारे में कई थ्योरियां देखने को मिलेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार सबसे रोचक थ्योरी है "मनुष्य के मस्तिष्क के मध्य हिस्से में स्थित pineal ग्लैंड को तीसरी आँख का प्रतीक मानना।" यह चावल के दाने के आकार की होती है।

इस ग्लैंड की कुछ विशेषताएं मनुष्य की आँखों की तरह होती है

यह ग्लैंड दिमाग के दोनों गोलार्द्धों के ठीक मध्य में स्थित होती है, लेकिन इसकी कुछ विशेषताएं मनुष्य की आँख के समान प्रतीत होती है। Pineal ग्लैंड मेलाटोनिन हॉर्मोन का स्त्राव करती है, जो 'स्लीप और वेक साइकिल' को मैनेज करता है।

यह लाइट सेंसेटिव भी होती है इसलिए इसे तीसरी आँख भी माना जाता है

इसके साथ ही इसे एनलाइटमेंट से जोड़कर भी देखा जाता है। कुछ विशेषज्ञ इसे आध्यात्मिक और भौतिक दुनिया के बीच का संबंध सूत्र भी मानते हैं।

तीसरी आँख दिखाती है अनदेखा

हमारी दोनों आँखों से हम अपने आस-पास की वस्तुओं को देखते हैं, पर यह तीसरी आँख हमें वो दिखाती है जो हम आमतौर पर नहीं देख पाते।

सिध्दान्तों के अनुसार प्राचीनकाल में मनुष्य की भी तीसरी आँख हुआ करती थी

लेकिन धीरे-धीरे जब मनुष्य का विकास हुआ तो धीरे-धीरे यह आँख भी अंदर धंस गयी और pineal ग्लैंड के रूप में विकसित हुई।




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