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रावण और मंदोदरी ने इस जगह मंडप में लिए थे सात फेरे

27-Sep-17 16:55रावण और मंदोदरी ने इस जगह मंडप में लिए थे सात फेरे
रावण और मंदोदरी ने इस जगह मंडप में लिए थे सात फेरे

आज जिस जगह के बारे में हम बता रहे हैं वहां की मान्यता है कि रावण का विवाह जोधपुर की प्राचीन राजधानी मंडोर में मयासुर की पुत्री मंदोदरी के साथ हुआ था। मंडोर की पहाड़ी पर खंडहर में बदल रहे एक स्थान की ऐसी मान्यता है कि रावण ने यहीं पर मंदोदरी के साथ सात फेरे लिए थे। रावण की बारात में जो भी ब्राहमण आये थे वो सब यहीं पर बस गए। इन लोगों ने जोधपुर में बाकायदा मंदिर बनवाकर इसमें रावण व मंदोदरी की विशाल प्रतिमा स्थापित कर रखी है। हर रोज इनकी पूजा भी करते हैं।

 

ऐसा कहा जाता है कि असुरों के राजा मयासुर का दिल हेमा नाम की एक अप्सरा पर आ गया। हेमा को प्रसन्न करने के लिए उसने जोधपुर शहर के निकट मंडोर का निर्माण किया। मयासुर और हेमा की एक बहुत सुंदर पुत्री का जन्म हुआ। इसका नाम मंदोदरी रखा गया। एक बार मयासुर का देवताओं के राज इन्द्र के साथ विवाद हो गया और उसे मंडोर छोड़ कर भागना पड़ा। उसके जाने के बाद मंडूक ऋषि ने मंदोदरी की देखभाल की। अप्सरा की बेटी होने के कारण मंदोदरी बहुत सुंदर थी।

 


जब मंदोदरी के लिए वर की तलाश शुरू हुई तो उस समय के सबसे बलशाली और पाराक्रमी होने के साथ विद्वान राजा रावण पर जाकर पूरी हुई। उन्होंने रावण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। मंदोदरी को देखते ही रावण शादी के लिए तैयार हो गया। तब रावण अपनी बारात लेकर शादी करने के लिए मंडोर पहुंचा। मंडोर की पहाड़ी पर अभी भी एक स्थान को लोग रावण की चंवरी (ऐसा स्थान जहां वर-वधू फेरे लेते है) कहते है।

 


मंदिर में शिवभक्त रावण व मंदोदरी को भगवान शिव की पूजा करते हुए दर्शाया गया गया है। हर साल रावण दहन के समय गोधा गौत्र के ब्राह्मण बाकायदा शोक प्रकट करते है और किसी के दाह संस्कार से लौटने के पश्चात होने वाले सारे नियमों की पालना करते है।

 




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