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इस अनोखे मंदिर में भक्तों को प्रसाद में दी जाती है चप्पल

28-Sep-17 17:12इस अनोखे मंदिर में भक्तों को प्रसाद में दी जाती है चप्पल
इस अनोखे मंदिर में भक्तों को प्रसाद में दी जाती है चप्पल

अगर आपको को प्रसाद में कोई चप्पल दे तो शायद ही आप यकीन करेंगे। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां प्रसाद में आपको चप्पल मिलेगी।  भगवान के प्रति इंसानी आस्था ऐसी है कि मंदिरों में चप्पल, जूते रखने की बात तो दूर हम सपने में भी ऐसे ख्याल आने को गुनाह मानते हैं। इस मंदिर में मां दुर्गा को नई चप्पल और सैंडिल चढ़ाई जाती है। इस मंदिर का नाम जीजी बाई का मंदिर है, जो भोपाल के कोलार इलाके में एक पहाड़ी पर बना है। जब यहां बड़ी मात्रा में चप्पल जमा हो जाती हैं तो आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में बांट दी जाती हैं।

 

चप्पल के साथ टोपी और घड़ी भी चढ़ाते हैं

गर्मी के मौसम में इस मंदिर में देवी मां के भक्त चप्पल के साथ-साथ चश्मा, टोपी और घड़ी भी चढ़ाते हैं। मंदिर के सेवक ओम प्रकाश महाराज बताते हैं कि यहां मां दुर्गा की देखभाल एक बेटी की तरह होती है। ओम महाराज के अनुसार कई बार उन्हें ये आभास होता है कि देवी खुश नहीं है तो दिन में दो-तीन घंटे के बाद माता के कपड़े बदल देते हैं।

 


मंदिर की मान्यता

इस मंदिर को लोग सिद्धिदात्री पहाड़ावाला मंदिर भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि तकरीबन 18 साल पहले ओम प्रकाश नाम के एक महाराज ने मूर्ति स्थापना की थी। कहा जाता है कि इस महाराज ने तब शिव-पार्वती का विवाह कराया था और खुद कन्यादान किया था। तब से ओम महाराज मां सिद्धिदात्री को अपनी बेटी मानकर पूजा करते हैं।​

 


विदेशों से भी चढाते हैं चप्पल

ओम महाराज के अनुसार यहां आने वाले कुछ लोग विदेशों में भी बस गए हैं। मन्नत पूरी होने पर उनके भक्त माता के लिए विदेशों से भी चप्पल भेजते हैं। मां दुर्गा के लिए सिंगापुर और पेरिस से भी चप्पल आई है। जब भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चप्पलों की संख्या बढ़ जाती है तो उसे देवी मां के प्रसाद के रूप में लोगों में बांट दिया जाता है।

 


अक्सर मंदिर में रंग-बिरंगे फूल, मालाएं, नारियल, प्रसाद, चिरौंजी चढ़ाई जाती है। लेकिन, राजधानी भोपाल के इस देवी मंदिर में मन्नत पूरी होने पर भक्त देवी मां को चप्पलें चढ़ाते हैं। कह सकते हैं कि हर साल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहाड़ी पर स्थित मंदिर में फुटवियर मेला लगता है।

 




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