ख़बरी दोस्त

इस किले से नीचे फेंक कर दी जाती थी कैदियों को सजा

5-Apr-17 15:08इस किले से नीचे फेंक कर दी जाती थी कैदियों को सजा
इस किले से नीचे फेंक कर दी जाती थी कैदियों को सजा

भारत में कई किले ऐसे हैं जिनके बारे में जयादातर लोग जानते होंगे लेकिन आज जिस किले के बारे में हम बता रहे हैं उसके बारे में शायद ही जानते होंगे। यदि आप कभी महाराष्ट्र गए हो या घूमने जा रहे हो और वहां रायगढ़ का किला नहीं देखा तो फिर क्या देखा। रायरी के नाम से मशहूर रायगढ़ किला खूबसूरत होने के साथ-साथ अपने आप में कई ऐतिहासिक घटनाएं भी समेटे हुए है। यह एकलौता ऐसा किला है जिसे शिवाजी महाराज के जीते जी कोई नहीं जीत सका।

 

इस किले से जुडी हैं कुछ दिलचस्प घटनाएं

- शिवाजी महाराज ने 1674 ईस्वी में इसे अपनी राजधानी बनाया था और यहीं उन्होंने 1680 में अपने प्राण त्याग दिए थे।

- यह किला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाद से 27 किमी दूर है।

- करीब 5.12 किलोमीटर में फैला यह किला है सह्याद्रि पहाड़ियों की खड़ी कगारों से अरब सागर के ऊंचे किनारों तक पहुंचता है।

- इसी किले में शिवाजी ने अपना राज्‍याभिषेक करवाया था और छत्रपति की उपाधि धारण की थी।

 

इस किले से नीचे फेंककर दी जाती थी कैदियों को सजा

इस किले के तीन हिस्से हैं, पहला पश्चिम में हिरकणी, दूसरा उत्तर में टकमक टोक और तीसरा पूर्व में है भिवानी। इन तीनों हिस्सों से कोई न कोई दिलचस्प कहानी जुड़ी है। टकमक टोक के बारे में यह कहा जाता है कि इस जगह से कैदियों को नीचे फेंक कर मौत की सजा दी जाती थी। दरअसल, टकमक टोक किले की पहाड़ी का किनारा है, जहां से गहरी खाई पड़ती है।

 

जानें इतिहास के बारे में

रायगढ़ पहले रायरी के नाम से जाना जाता था। 1656 ईस्वी में चंद्रराव मोरे से शिवाजी ने कब्जा कर लिया था। इससे पहले भी इस शहर पर कई शासकों ने सत्ता संभाली। शिवाजी ने रायरी को अपनी राजधानी चुनी और इसका नाम रायगढ़ रखा।शिवाजी के समय रायगढ़ में करीब 300 घर बनाए गए। शिवाजी के बाद 1689 ईस्वी तक किले पर संभाजी का शासन रहा। इसके बाद इस पर मुगलों ने कब्जा कर लिया। 1818 ईस्वी में रायगढ़ में अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया।

 

दुश्मन अंदर न घुस सके इसलिए बनाया एक रास्ता

रायगढ़ किले पहुंचने का एक ही रास्ता है। शायद शिवाजी का एक ही रास्ता बनाने का उद्देश्य यही रहा होगा कि दुश्मनों किले के अंदर न घुस सकें। इस किले पर जाने के लिए पहले 1400-1450 सीढि़यां चढ़नी पड़ती थी। लेकिन अब इस किले पर जाने के लिए रोपवे की व्‍यवस्‍था है।

 

आसमान से कुछ ऐसा दिखता है रायगढ़ किला

 

रायगढ़ किले के अवशेष

 

रायगढ़ किले का गंगा सागर लेक, ऐसा कहा जाता है कि शिवाजी के राज्याभिषेक के लिए लाया गया गंगा जल यहीं रखा गया था।

 

टकमक टोक इसके बारे में यह कहा जाता है कि इस जगह से कैदियों को नीचे फेंक कर मौत की सजा दी जाती थी।

 

शिवाजी की प्रतिमा रायगढ़ किले पर मौजूद है।

 

रायगढ़ किले पर अब रोप वे की सुविधा भी है।




संबंधित पोस्ट