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अब पुरुष भी दर्ज करा सकते हैं घरेलू हिंसा का केस

4-Apr-17 19:38अब पुरुष भी दर्ज करा सकते हैं घरेलू हिंसा का केस
अब पुरुष भी दर्ज करा सकते हैं घरेलू हिंसा का केस

अक्सर हम हमेशा से सुनते आये हैं कि बहुत सी औरते कहती हैं कि अपनी पड़ोस वाली है न उसका पति और सास सुसर उसे रोज़ मारते-पीटते हैं, क्या आपने यही वाक्य पुरुष के लिए भी सुना है नही न? क्या घरेलूं हिंसा कि शिकार सिर्फ महिलाएं ही हो सकती है पुरुष नही? पुरुष को समाज में शुरू से ही मजबूत माना जाता रहा है पर इसका मतलब ये तो नही है कि घर की चारदिवारी के अंदर पुरुष को सताया न जाता हो।

इत्तेफाक तो देखिये आज तक आपने कई ऐसे मुकदमे देखे होंगे जिनमे एक महिला खुद को दुखयारी साबित करते हुए थाना, कचहरी, कोर्ट के सामने बड़ी आसानी से अपने पति और सुसराल वालो को जेल भिजवा देती है। अगर ऐसा पुरुष करना चाहे तो? सबसे पहले तो समाज ही उसका मजाक उड़ाएगा और लोग कहेंगे कि घर में एक औरत से पिट गया तू! थू है तेरी मर्दानगी पर घर में हो रहे पुरुष पर हिंसा को रोकने के लिए और ऐसे लोगों को समाज में बोलने का मौका दिया गया है। आखिकार देश के न्यायालयों को इस बात का एहसास हो गया है कि पीड़ित सिर्फ महिलाएं ही नही, पति भी हो सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने घरेलू हिंसा के कानून में फेरबदल कर दिया है पहले इस धारा 2(Q) में पुरुष का ज़िक्र था, जिसे कोर्ट ने हटाकर व्यक्ति कर दिया है जस्टिस कुरियन और नरीमन ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया। घरेलू हिंसा कानून 2005 में ऐसा ज़िक्र था कि घरेलू हिंसा विरोधी कानून के तहत पत्नी या फिर बिना विवाह किसी पुरुष के साथ रह रही महिला पर मारपीट, यौन शोषण, आर्थिक शोषण या फिर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल की परिस्थिति में कार्रवाई की जा सकती है पर इसमें बदलाव करते हुए ये कहा गया है कि अगर पुरुषों के साथ भी ऐसा कुछ होता है तो महिलाओं पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

आये दिन न जाने कितने पुरुष, पति, अपने ऊपर होने वाले शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति सहते हुए या तो जीने को मजबूर है या मौत को गले लगा लेते हैं ऐसे में कानून उनको भी आवाज उठाने का मौका दे रहा है ये बदलाव बहुत ज़रूरी था क्योंकि हर स्थिति में पीड़ित सिर्फ़ महिलाएं ही नहीं होती।




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