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जानते हैं भारत में रुपया कहाँ बनता है और कैसे नष्ट किया जाता है

5-Apr-17 16:42जानते हैं भारत में रुपया कहाँ बनता है और कैसे नष्ट किया जाता है
जानते हैं भारत में रुपया कहाँ बनता है और कैसे नष्ट किया जाता है

रुपया शब्द का प्रयोग सबसे पहले शेर शाह सूरी ने भारत में अपने शासन(1540-1545) के दौरान किया था। भारत में नोटों को छापने का काम भारतीय रिज़र्व बैंक और सिक्कों को ढालने का काम भारत सरकार करती है। भारत में सबसे पहले वाटर मार्क वाला नोट 1861 में छपा था। वर्तमान में भारत समेत 8 देशों की मुद्राओं को रुपया कहा जाता है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा भारतीय नोट में 15 भाषाओँ का इस्तेमाल किया जाता है।

रूपये का कागज तैयार करने के लिए दुनिया में 4 फार्म हैं।

1. फ्रांस की अर्जो विगिज

2. अमेरिका का पोर्टल

3. स्वीडन का गेन

4. पेपर फैब्रिक्स ल्युसेंटल

भारत में नोट कहाँ छपते हैं?

देश में चार बैंक नोट प्रेस, चार टकसाल और एक पेपर मिल है। नोट प्रेस के देवास (मध्य प्रदेश), नासिक (महाराष्ट्र), सालबोनी (पश्चिम बंगाल)और मैसूर(कर्नाटक) में हैं।

देवास प्रेस में एक साल में 265 करोड़ नोट छपते हैं। यहाँ पर 20, 50, 100, 500, रूपए के नोट छपते हैं। देवास में ही नोटों में प्रयोग होने वाली स्याही का उत्पादन किया जाता है।

करेंसी प्रेस नोट नासिक: सन 1991 से यहाँ पर 1, 2, 5, 10, 50, 100 के नोट छापे जाते हैं। पहले यहाँ 50 और 100 रूपये के नोट ही छापे जाते थे।

मध्य प्रदेश के ही होशंगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल है। नोट छपाई के पेपर होशंगाबाद और विदेश से आते हैं। 1000 के नोट मैसूर में छपते हैं।

भारत में सिक्के कहाँ ढलते हैं?

भारत में चार जगहों पर सिक्के ढले जाते हैं। मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा

निशान से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ ढाला गया सिक्का?

हर सिक्के पर एक निशान छपा होता है जिसको देखकर पता लगाया जा सकता है कि यह किस मिंट का है। इस मिंट की शुरुआत 1986 में हुई। सबसे पहले 50 पैसे के सिक्के पर बनाया गया था।

हैदराबाद मिंट का चिन्ह

नोएडा मिंट का चिन्ह

मुंबई मिंट का चिन्ह

कोलकाता का कोई मिंट चिन्ह नही है।

नोट किस चीज से बनाये जाते हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नोट तैयार करने के लिए कॉटन से बने कागज और विशिष्ट तरह की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय करंसी नोट तैयार करने के लिए जिस कागज का इस्तेमाल होता है उसमें कुछ प्रोडक्शन महाराष्ट्र स्थित करंसी नोट प्रेस और अधिकांश प्रोडक्शन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद पेपर मिल में ही होता है। कुछ पेपर आयात भी किया जाता है। नोट छापने के लिए जिस ऑफसेट स्याही का उपयोग किया जाता है उसका निर्माण मध्य प्रदेश के देवास स्थित बैंकनोट प्रेस में होता है। नोट पर जो उभरी हुई छपाई नजर आती है उसकी स्याही सिक्किम में स्थित स्वीस फर्म की यूनिट सिक्पा में बनाई जाती है।

भारत में हर साल कितने नोट छापे जाते हैं?

रिजर्व बैंक के अनुसार, भारत में हर साल 2,000 करोड़ करेंसी नोट छापा जाता है। इसकी 40 प्रतिशत लागत कागज और स्याही के आयात में जाती है। यह कागज जर्मनी, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से आयात किया जाता है।

यह कौन तय करता है कि कितने नोट और कितने मूल्य के नोट छापे जाने हैं?

यह भारतीय रिज़र्व बैंक तय करता है। छपने वाले नोटों की मात्रा पूरी अर्थव्यवस्था में नोटों के परिचालन, गंदे नोटों और आरक्षित आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है।

यह कौन तय करता है कि कितने सिक्कों की ढलाई की जानीहै?

यह तय करने का अधिकार सिर्फ सरकार को है। हालांकि एक रुपये का नोट भी वित्त मंत्रालय ही छापता है और उसके ऊपर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

नोट कैसे छपते हैं?

विदेश या होशंगाबाद से आई पेपर शीट एक खास मशीन सायमंटन में डाली जाती है। फिर एक अन्य मशीन जिसे इंटाब्यू कहते हैं उससे कलर किया जाता है। यानी कि शीट पर नोट छप जाते हैं। इसके बाद अच्छे और खराब नोट की छटनी होती है। एक शीट में करीब 32 से 48 नोट होते हैं। खराब को निकालकर अलग करते हैं बैंक नोट की संख्या चमकीली स्याही से मुद्रित होती है। बैंक नोट में चमकीले रेशे होते हैं। जिसे अल्ट्रावायलेट रोशनी में देखे जा सकते हैं। कॉटन और कॉटन के रेशे मिश्रित एक वॉटरमार्क पेपर पर नोट मुद्रित किया जाता है। भारत में सबसे पहला वाटर मार्क वाला नोट 1861 में छपा था।

नोटों की क्रम संख्या कैसे दी जाती है?

हर वित्तीय वर्ष के शुरू में यह अनुमान लगाया जाता है कि किस वर्ग के कितने नोट छापे जाने हैं कितने नोटों की आपूर्ति करनी है और कितने बदले जाने हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक के पास चार प्रिंटिंग प्रैस हैं उनमें यह काम बांट दिया जाता है। किसी भी वर्ग के नोट एक करोड़ तक की संख्या में छापे जाते हैं। उसके बाद उस संख्या के आगे अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षर जोड़े जाते हैं। वर्णमाला के अक्षर का चयन बेतरतीब ढंग से किया जाता है यह आमतौर पर कई साल के बाद दोहराया जाता है।

बेकार हो चुके नोटों को कहां जमा किया जाता है?

नोट तैयार करते वक्त ही उनकी सही बने रहने की अवधि तय की जाती है। यह अवधि समाप्त होने पर या लगातार प्रचलन के चलते नोटों में खराबी आने पर रिजर्व बैंक इन्हें वापस ले लेता है। बैंक नोट व सिक्के सर्कुलेशन से वापस आने के बाद इश्यू ऑफिसों में जमा कर दिए जाते हैं।

कटे फटे नोटों का क्या किया जाता है?

जब कोई नोट पुराना हो जाता है या दुबारा चलन में आने के योग्य नहीं रहता है तो उसे व्यावसायिक बैंकों के जरिये जमा कर लिया जाता है और दुबारा बाजार में नहीं भेजा जाता है अब तक कि प्रथा यह थी। कि उन पुराने नोटों को जला दिया जाता था परन्तु अब RBI ने पर्यावरण की रक्षा के लिए जलाने  के स्थान पर 9 करोड़ रुपये की एक मशीन आयात की यह मशीन पुराने नोटों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है फिर इन टुकड़ों को गलाकर ईंट के आकर में बनाया जाता है ये ईंटें कई कामों में प्रयोग की जाती हैं।

भारत में हर साल 5 मिलियन नोट चलन से बाहर हो जाते हैं जिनका कुल वजन 4500 टन के बराबर होता है। यह बात चिंताजनक है कि जितनी मात्रा में भारत को नोट छापने के लिए स्याही और कागज की जरुरत पड़ती है उतना उत्पादन यहाँ नही हो पाता है और सरकार को विदेशों से इन दोनों चीजों का आयात करना पड़ता है। इसी के विकल्प के रूप में सरकार ने 2010 से देश के कुछ हिस्सों में प्रयोग के तौर पर प्लास्टिक के 10 रुपये के नोटों का चलन शुरू किया है।




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