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फरीदाबाद स्थित एमएफ हुसैन के घर की 37 साल से हिंदू फैमिली कर रही देखभाल

10-Jun-17 16:28फरीदाबाद स्थित एमएफ हुसैन के घर की 37 साल से हिंदू फैमिली कर रही देखभाल
फरीदाबाद स्थित एमएफ हुसैन के घर की 37 साल से हिंदू फैमिली कर रही देखभाल

भारत का पिकासो कहे जाने वाले मकबूल फिदा हुसैन (एमएफ हुसैन) देश के सबसे महान और सबसे विवादित पेंटरों में से एक रहे हैं। इस सफेद दाढ़ी और बड़े बाल वाले एक शख्स के हाथों में पड़ी एक कूची जब चलती तो रंगों को नई पहचान दे देती थी। हुसैन का जन्म 17 सितम्बर 1915 को पंढरपुर, मुंबई में हुआ था और निधन 9 जून 2011 को लंदन में हुआ था। एमएफ हुसैन को हिंदू विरोधी कहा जाता रहा, लेकिन उनका भारत में जो आशियाना है उसमें कुछ और ही नजारा दिखता है। फरीदाबाद के सेक्टर-21 स्थित उनका एक घर है।

 


हिंदू कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हुसैन साहब के घर व उनकी पेंटिंग्स की देखभाल कई सालों से एक हिंदू परिवार कर रहा है। यहाँ 37 साल से मथुरा के प्रीतम सिंह उनकी पेंटिंग्स की देखभाल कर रहे हैं। यह घर हुसैन साहब की यादों को समेटे हुए है। प्रीतम कट्टर हिंदू हैं और उनके गले में कंठी की माला और ललाट पर चंदन लगा रहता है। प्रीतम ने कहा कि हुसैन साहब ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि पेंटिंग में वह कलाकारी दिखाते थे, लेकिन निजी जीवन में उन्होंने मेरे चंदन और कंठी के बारे में कभी कुछ नहीं कहा। जब भी इस घर में आते थे, पूरे परिवार का हालचाल पूछते थे।

 


प्रीतम का कहना है कि वह रोज इसी घर में पूजा-पाठ भी करते हैं। हुसैन साहब का यह चेहरा किसने देखा होगा। वह हिंदुओं की भी उतनी ही कद्र करते थे, जितना कि अपने धर्म की। उनके घर में घुसते ही 'बुद्धम् शरणम् गच्छामि' लिखी पेंटिंग स्वागत करती है। उनके कोठी में बनीं हुसैन सराय में रखीं पेंटिग्स में किसानों का दर्द और महिलाओं के संघर्ष को भी उकेरा गया है। 1980 से हुसैन के इस घर की प्रीतम देखभाल कर रहे हैं। प्रीतम सिंह हुसैन साहब की सभी पेंटिंग्स की देखभाल कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के निशाने पर आने के बाद वे फरीदाबाद नहीं आए। इसके बाद वे मुंबई, दुबई, लंदन में रहे। एमएफ हुसैन के घर पर उनके परिवारों के लाेग बीच-बीच में आते हैं। पेंटिंग्स देखकर वापस चले जाते हैं।

 


हुसैन साहब की पेंटिंग्स की लंदन और न्यूयॉर्क में बहुत डिमांड थी। यहाँ पे पेंटिंग्स काफी महंगी बिकती थी। मॉडर्न पेंटिंग के सबसे बड़े नाम पिकासो के साथ सम्मानित किए जा चुके हुसैन ने यूरोप और अमेरिका में न सिर्फ नाम बल्कि बहुत पैसा भी कमाया। 40 की उम्र में वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में गिने जाने लगे। सरकार ने उन्हें पद्मश्री भी दिया। बाद में बहुत से मान-सम्मान और मिले। कई विवाद भी उनके साथ जुड़े। पहले पेंटिंग और उनका घर दिखाने के लिए पैसे लिए जाते थे लेकिन उनकी मौत के बाद अब उनके खास जानकारों के अलावा किसी को घुसने नहीं दिया जाता है।

 




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