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ganga

8-Apr-17 16:04ganga
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भारत पूरी दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जिसमें इतने धर्म, जाति, भाषा और संस्कृति हैं। हम अपनी संस्कृति को सर्वोच्च स्थान देते हैं और दूसरी तरफ़ अपनी सहूलियतों के हिसाब से उसका मज़ाक भी बना देते हैं। हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदि का दर्जा मिला है, वहीं दूसरी तरफ़ इसमें पूरे शहर का मल और गंदगी ऐसे प्रवाह किया जाता है जैसे ये कोई गंदा नाला हो। मान्यता अनुसार, हिन्दू व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी अस्थियां गंगा में विसर्जित होती हैं, लेकिन कई लोग पूरी लाश इस नदी में प्रवाहित कर देते हैं।

ये तस्वीर 2008 की है इस तस्वीर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंगा कितनी प्रदूषित हो गयी है।

इन तस्वीरों को देख आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि क्या वाकई हम अपनी परंपरा, संस्कृति और धर्म के नाम पर कई सारी चीज़ों को अंदाज़ कर देते हैं।

गंगा में बढ़ती गंदगी को देखते हुए बीते एक साल में गंगा में ढ़ाई फीट पानी घट गया है।

प्रधानमंत्री ने गंगा को साफ करने के लिए पूरे देश में 90 लाख सावर्जनिक शौचालय बनाए। जिसके बाद भी गंगा की हालत अभी ज्यों की त्यों है।

अगर इस तस्वीर पर गौर करे तो क्या वाकई सच है कि आज गंगा बेहद प्रदूषित हो चुकी है।

धार्मिक महत्वो के साथ ही गंगा देश की सबसे बड़ी नदी है। जिससे भारत के 11 राज्यों में भारत की आबादी के 40 प्रतिशत लोगों को पानी उपलब्ध कराती है।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार गंगा में अब आर्सेनिक, फ्लोराइड एवं क्रोमियम जैसे जहरीले तत्व बढ़ने लगी है। जो कि चिंता का बड़ा कारण है।

हमारी लापरवाही की वहज से पावन गंगा दिन प्रतिदिन मैली होती जा रही हैं। आज गंगा दुनिया की छठी सबसे प्रदूषित नदी बन गई है।

गंगा में अनगिनत टैनरीज, रसायन संयंत्र, कपड़ा मिलों, डिस्टिलरी, बूचड़खानों और अस्पतालों का अपशिष्ट बहा दिया जाता है जो कि गंगा के प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा रहा है।

गंगा में प्रतिदिन 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा गिराया जा रहा है।

हिन्दू मान्यताओ के अनुसार पवित्र गंगा पर लोगों को मोक्ष प्राप्त होता है लेकिन प्रदूषण के कारण गंगा का पानी प्रतिदिन काला पड़ रहा है।

गंगा पर बढ़ते प्रदूषण का कारण ये भी है यहाँ पर लोगों का कपड़े धोना और इसका इस्तेमाल सावर्जनिक शौच की तरह करना है। इसके बाद भी लोग अपने पूजा पाठ का सामान गंगा में ही बहाते है।

उत्तर प्रदेश की 12 प्रतिशत बीमारियों की वजह प्रदूषित गंगा का जल है। अब गंगाजल न पिने के योग्य है, न ही स्नान करने के योग्य है और न सिचांई करने के योग्य है।

प्रदूषण होने के कारण गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गई है। जिसके कारण गंगा के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों को समाप्त कर देते हैं।

गंगा में लाभदायक विषाणु की संख्या कम हो गई है। जिसके चलते कछुए, मछलियाँ एवं जल-जीव समाप्ति की कगार पर है।

उत्तर प्रदेश के परियार गाँव के पास करीब 102 लाशें नदी में तैरती पाई गई है।

इस तस्वीर में देख सकते हैं कि गंगा के किनारे कैसे जलती है लाशें

गंगा को प्रदूषित करने का एक कारण ये भी है कि गंगा के आसपास के क्षेत्र में लोगों के शव को जलाकर उनकी अस्थियों को वहीं विसर्जन करना।

इस तस्वीर में मुर्दा को जलाने की तैयारी की जा रही है।

सरकार गंगा को अपने पुराने स्वरूप में लाने की प्रयास कर रही है लेकिन इसका कोई ख़ास परिणाम सामने नही आया है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि जब तक गंगा में गन्दे नालों का पानी, औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा, सीवेज, घरेलू कूड़ा-करकट पदार्थ आदि गिरते रहेंगे जब तक गंगा का साफ़ रहना मुश्किल है।

ये ऐसा ही चलता रहा तो गंगा का जलस्तर बहुत तेज़ी से नीचे आ सकता है।

अभी सरकार ने गंगा साफ़ करने के लिए 20 हजार करोड़ खर्च कर चुकी है। लेकिन इस अभी तक कोई परिणाम नही निकले है।