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इन देशों में चलते हैं दूसरे देशों के नोट

5-Apr-17 12:33इन देशों में चलते हैं दूसरे देशों के नोट
इन देशों में चलते हैं दूसरे देशों के नोट

आज हम आपको कुछ ऐसे देशों के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ पर खुद की करेंसी का इस्तेमाल नही होता। भारत में लोग करेंसी बदलने के लिए लाइन में लगे हुए हैं यह जानकारी उन लोगों लिए बेहद रोचक लगेगी जिन्हें अब पता चलेगा कि कुछ देश ऐसे भी हैं जिनके पास अब तक अपनी खुद की करेंसी भी नही है और दूसरे देश की करेंसी का इस्तेमाल करते हैं।

देश - मोनाको

करेंसी - यूरो

यूरोपियन कंट्री मोनाको का क्षेत्रफल सबसे कम है और यह दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। इस देश में खुद की करेंसी का इस्तेमाल नहीं होता। यह देश पूरी तरह से फ्रांस पर निर्भर है और यहाँ पर यूरो करेंसी चलती है।

देश - पनामा

करेंसी - अमेरिकी डॉलर

पनामा 1903 में कोलंबिया से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था। हालांकि पनामा की आजादी के पीछे अमेरिका का ही हाथ था इसी वजह से यहाँ की अर्थव्यवस्था भी अमेरिका पर आधारित थी और यहाँ पर अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल किया जाता है।

देश - जिम्बाब्वे

करेंसी - अमेरिकन डॉलर

2009 में जिंबाब्वे में भारी मंदी का दौर था और इसी वजह से इस दक्षिण अफ्रीकी देश में अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल शुरू किया गया।

देश - इक्वाडोर

करेंसी - अमेरिकन डॉलर

यह देश भी पूरी तरह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर निर्भर है और इसी वजह से यहाँ पर अमेरिकन डॉलर का इस्तेमाल किया जाता है।

देश - कोसोवो

करेंसी - यूरो

यह देश एक विवादास्पद देश है क्योंकि यहाँ के क्षेत्र को लेकर कई देश अपना वर्चस्व जताते हैं इस देश में भी यूरो का इस्तेमाल किया जाता है।

देश - नाउरु

करेंसी - ऑस्ट्रेलियन डॉलर

यह देश दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है इस देश के पास ना ही अपनी खुद की सेना है और ना ही खुद की करेंसी। इस देश की जनसंख्या करीबन 10,000 है कुछ वर्षों पहले इस देश पर जर्मनी का कब्जा हुआ करता था लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और ब्रिटेन ने इस देश को आजाद करा दिया था तब से यहाँ पर ऑस्ट्रेलियन करेंसी का इस्तेमाल किया जाता है।

देश - लिचटेंस्टेन

करेंसी - स्विस फ्रैंक

यह यूरोपियन कंट्री मात्र 164 वर्ग किलोमीटर की है इस देश की कुल आबादी 36925 है लेकिन प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी के मामले में यह अव्वल नंबर पर आता है। प्रथम विश्वयुद्ध से पहले यह जर्मनी का कब्जे वाला क्षेत्र हुआ करता था लेकिन इसे विश्व युद्ध के बाद आजाद करा लिया गया उसके बाद से यहां पर स्विस फ्रैंक का इस्तेमाल किया जाता है।




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