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500 और 1000 के नोट बंद कराने में इनका दिमाग था

5-Apr-17 11:51500 और 1000 के नोट बंद कराने में इनका दिमाग था
500 और 1000 के नोट बंद कराने में इनका दिमाग था

मंगलवार की रात देश के लिए काफी चौंकाने वाली रही क्योकि मोदी ने 500 और 1000 रुपयों के नोट पर रोक लगा दी। कहते है कि हर निति, निर्णय के पीछे किसी न किसी का दिमाग होता है जानते हैं 500 और 1000 के नोट बंद कराने के पीछे किसका दिमाग होगा ? आइये हम आपको बताते है इसके पीछे किसका दिमाग था। इसके पीछे अनिल बोकिल का दिमाग था। अनिल बोकिल पेशे से पुणे (महाराष्ट्र) के एक इंजीनियर है और यह अर्थक्रांति संस्थान के एक बहुत ही मुख्य सदस्य है। आपको बता दे कि अनिल वर्ष 2014 में चुनाव से पहले ही नरेंद्र मोदी से मिल चुके थे और उस समय ही उन्हें मुलाकात के लिए केवल 9 मिनट का ही समय दिया गया था। लेकिन जब भ्रष्टाचार और नकली रुपयों को रोकने के लिए ये अपना प्रस्ताव सुनाने लगे तो नरेंद्र मोदी ने इनका यह प्रस्ताव 2 घंटों तक सुना था। आपको हैरान करने वाली एक बात और बता देते है इन्होने ये प्रस्ताव कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को देने के लिए भी समय माँगा था लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गाँधी ने अनिल बोकिल को केवल 15 सेकंड्स का समय दिया था और राहुल ने कहा कि आप डॉ गोपाल मोहन से मिल लीजिए।

क्या थे प्रपोज़ल के सुझाव

इम्पोर्ट ड्यूटी छोड़ कर 56 तरह के टैक्स वापस लिए जाएं। बड़ी करेंसी जैसे 1000, 500 और 100 रुपये के नोट वापस लिए जाएं। सभी बड़े भुगतान और पेमेंट बैंक के ज़रिये चेक, डीडी और ऑनलाइन किया जाए। कैश ट्रांजेक्शन की लिमिट फिक्स की जाए और इन पर कोई टैक्स ना लगाया जाए।

प्रपोज़ल की खास बातें

वर्तमान में देश में हर रोज़ 2.7 लाख करोड़ रुपयों का बैंकिंग ट्रांजेक्शन होती है इस हिसाब से एक साल में लगभग 800 लाख करोड़ रुपये हुए समस्या ये है कि सिर्फ़ 20 प्रतिशत ट्रांजेक्शन ही बैंक के ज़रिये होती है बाकि 80 फीसदी कैश के ज़रिये होती है जिसको ट्रेस कर पाना नामुमकिन है देश की जो 78 फीसदी आबादी है वो हर रोज़ सिर्फ़ 20 रुपये ही खर्च करती है तो उन्हें फिर हज़ार के नोट की क्या ज़रूरत।

क्या होगा 500 और 1000 के नोट को वापस लेने से?

कैश ट्रांजेक्शन से होने वाला भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा लोगों की ब्लैकमनी या तो व्हाइट हो जाएगी या बेकार। लोगों के पास इकट्ठा नोट कागज़ के टुकड़े रह जाएंगे।मार्केट में ब्लैकमनी खत्म होने से प्रॉपर्टी इत्यादि की कीमतों पर लगाम लग जाएगी।सुपारी लेकर किये जाने वाले क्राइम अपने आप बंद हो जाएंगे और कैश ट्रांजेक्शन के ज़रिये आतंकवाद की फंडिंग पर भी रोक लगेगी। जाली नोटों का चलन भी ऐसे में बंद हो जाएगा और महंगी प्रॉपर्टी खरीदने के बाद रजिस्ट्री में हेर-फेर नहीं हो पायेगा।

56 तरह के टैक्सों को क्यों खत्म करना ज़रूरी है?

अगर उसकी मानें तो ये प्रपोज़ल लागू हो गया तो सभी चीज़ों की कीमतें घटेंगी और नौकरीपेशा लोग ज़्यादा पैसा पाएंगे। इस वजह से मांग और प्रोडक्शन बढ़ेगा, जो रोज़गार के अवसर भी बढ़ाएगा। बैंक सस्ते लोन उपलब्ध कराएंगे और इंटरेस्ट रेट घटेगा। प्रॉपर्टी की कीमतें कम हो जाएंगी और राजनीति में ब्लैकमनी का इस्तेमाल बंद हो जाएगा। पेट्रोल, डीज़ल और एफ़एमसिजी जैसी कमोडिटी 32 से 52 फीसदी तक सस्ती हो जाएंगी।




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