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रॉ एजेंट कैसे काम करते हैं

जब भी हम रॉ एजेंट या किसी इंटेलिजेंस एजेंट की जीवन शैली के बारे में सोचते हैं तो हमारे दिमाग में जेम्स बॉण्ड की फिल्मों की तस्वीरें घूमने लगती हैं और एक्शन, तहकीकात जैसे द्रश्यों के बारे में सोचने लगते हैं क्या ये वास्तव में यह सच है? क्या वास्तिवक जीवन में ऐसा होता है कुछ इंटेलिजेंस एजेंट केवल कागजी करवाई करते है और कुछ एजेंटों का कार्य रोमांचकारी एवं जोखिम भरा होता है कई बार ये एजेंट विदेशी भाषा, संचार अधिकारी, कॉल सेंटर सहायक आदि के रूप में हमारे देश की सीक्रेट इंटेलिजेंस एजेंसियों की सहायता करते हैं।

रॉ एजेंट बनने के बाद जीवन शैली कैसी होती है

रॉ एजेंट बनने के बाद देश-विदेश की यात्रा करने का अवसर मिलता है और विदेशी भाषाओं की जानकारी बहुत लाभकारी होती है और इस पेशे में अकेलापन भी महसूस होता है और काफी जाँच-पड़ताल करनी पड़ती है बैठकों में शामिल होना पड़ता है कई बार कुछ सीक्रेट ऑपरेशन बहुत खतरनाक होते हैं जिसके कारण अधिकारियों की सुरक्षा हेतु उनके नाम की जानकारी किसी को भी नही दी जाती है उनकी जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

रॉ एजेंट की ट्रेंनिग

रॉ एजेंटों की ट्रेनिंग में कई वर्ष लगते हैं। पहले इन्हें बुनियादी प्रशिक्षण और बाद में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

बुनियादी प्रशिक्षण लगभग 10 दिन का होता है जिसमे जासूसी की असली दुनिया से उनका परिचय कराया जाता है। उन्हें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सूचना सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, वैज्ञानिक ज्ञान, वित्तीय, आर्थिक और सामरिक विश्लेषण जैसे विषयों से संबंधित जानकारी भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा उन्हें सीआईए, आईएसआई, MI6 जैसी अन्य एजेंसियों से संबंधित कुछ मामलों का अध्ययन करवाया जाता है।

बेसिक ट्रेनिंग के बाद उन्हें फील्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो (FIB) में भेजा जाता है। वहाँ उन्हें 1-2 वर्षों तक ठंडें क्षेत्रों एवं जंगलों में सुरक्षित रहने के तरीकों एवं गुप्त ऑपरेशनों को संचालित करने के तरीके सिखाये जाते हैं। इसके बाद उन्हें बातचीत के तरीके एवं मिशन संचालित करने की कला सिखाई जाती है। बाद में उन्हें बेसिक ट्रेनिग कैंप भेज दिया जाता है।

रॉ एजेंट बनने के प्रमुख विशेषताएँ

बातचीत करने का शानदार तरीका होना चाहिए। इसके अलावा उस व्यक्ति में किसी भी दबाव, स्थिति और वातावरण में परिणाम प्राप्त करने का आत्मविश्वास एवं दृढ़ संकल्प होना चाहिए। इसके अलावा उस व्यक्ति में पेशेवर अंदाज और व्यक्तिगत निष्ठा होनी चाहिए जो कठिन प्रशिक्षण और विकासात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से आती है।

रॉ एजेंट के रूप में काम करने के लिए पात्रता

देश का नागरिक होना चाहिए। आपराधिक नही होना चाहिए। नशीली दवाओं का आदि नही होना चाहिए। प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की हो और कम से कम एक विदेशी भाषा पर उसकी पकड़ होनी चाहिए। हमेशा देश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने के लिए तैयार होना चाहिए।

रॉ एजेंट की भर्ती और उनक वेतन

प्रारम्भ में रॉ मुख्य रूप से उन प्रशिक्षित खुफिया अधिकारियों पर निर्भर था, जिनकी सीधी भर्ती होती थी। इन अधिकारियों का संबंध इंटेलिजेंस ब्यूरो के बाहरी विंग से होता था। इसके बाद जब रॉ के कार्यों का विस्तार हुआ तो सेना, पुलिस और भारतीय राजस्व सेवा से भी उम्मीदवारों की भर्ती की गई। बाद में, रॉ में विश्वविद्यालय से स्नातक हुए अभ्यर्थियों की भी भर्ती शुरू की गई।

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1983 में रॉ ने अपनी खुद की रिसर्च एंड एनालिसिस सेवा (RAS) प्रारंभ की थी एवं केन्द्रीय स्टाफिंग योजना के तहत ग्रुप ए सिविल सेवकों की नियुक्ति शुरू की थी। इन उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा के सभी चरणों में पास होना पड़ता था। और उसमे से सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों को रॉ की परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाती थी। इसके अलावा उम्मीदवार के पास 20 साल का कार्य अनुभव होना चाहिये। यह एक स्थायी नौकरी नहीं है, लेकिन एक व्यक्ति प्रति माह 0.8-1.3 लाख रुपये कमा सकता है।




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