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दंगल फिल्म रिव्यू: धाकड़ बेटियों पर बनी है आमिर की दंगल

 

फिल्म: दंगल

डायरेक्टर: नितेश तिवारी

स्टारकास्ट: आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख,सान्या मल्होत्रा, ज़ायरा वसीम, सुहानी भटनागर, अपारशक्ति खुराना और गिरीश कुलकर्णी

 

बॉलीवुड में कई फिल्में ऐसी बनी हैं जो खेल पर आधारित हैं लेकिन आमिर खान की आने वाली फिल्म दंगल काफी दिनों से चर्चा में हैं। यूट्यूब पर दंगल फिल्म का ट्रेलर लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। इस फिल्म को ज्यादा फिल्मी ना बनाते हुए डायरेक्टर नितेश तिवारी ने इस फिल्म को परदे पर ऐसे दिखाया है कि फिल्म के हर सीन, हर एक्सप्रेशन और सारे डायलॉग सब परफेक्ट है। फिल्म के हर सिचुएशन के साथ आप खुद को जोड़कर देखने लगते हैं। फिल्म में कॉमिक टाइमिंग इतनी सटीक है कि आप हंसते भी हैं और इमोशनल सीन में रोते भी हैं। जब आप दंगल फिल्म देखेंगे तब आपको लगेगा कि आप परदे पर एक सुपरस्टार को नहीं बल्कि एक आम आदमी को देख रहे हो। क्यूंकि आमिर ने महावीर सिंह फोगट की तरह दिखने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है।

 

कहानी

दंगल फिल्म हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट के जीवन पर आधारित फिल्म है।महावीर सिंह फोगट पूर्व नेशनल लेबल का पहलवान है जो हमेशा एक बेटे की चाह में जी रहा है, वो बेटा जो उसके लिए गोल्ड मेडल जीत कर ला सके, किसी इंटरनेशल इवेंट में। एक बेटे के इंतजार में महावीर सिंह फोगट की चार बेटियां पैदा हो जाती हैं। महावीर सिंह फोगट दुखी हो जाता है और अपने गोल्ड मेडल को अलविदा कह देता है। हालांकि लड़कियां और लड़कों का अंतर उसके लिए तब मिटता है जब उसकी दो छोटी छोटी बेटियां गीता (ज़ायरा वसीम) और बबीता(सुहानी भटनागर) पड़ोस के दो बच्चों को बुरी तरह पीट देती हैं। क्योंकि उन दो लड़कों ने लड़कियों पर बुरे कमेंट किए होते हैं। महावीर सिंह फोगट को तुरंत इस सच का एहसास हो जाता है कि गोल्ड तो गोल्ड ही रहेगा, लड़का जीत के लाए या फिर लड़की।

 

इसके बाद ही महावीर सिंह फोगट अपनी बेटियों गीता और बबीता को कुश्ती के गुर सिखाकर उन्हें रेसलिंग का चैंपियन बनाता है और यहीं से शुरू होती है फिल्म की थीमलाइन - महारी छोरियां छोरों से कम हैं के? लेकिन इस बीच किन उतार-चढ़ाव से उसे गुजरना पड़ता है और कितनी जलालत झेलनी पड़ती है ये भी दिखाया गया है। जैसा कि एक डायलॉग आपने ट्रेलर में देखा होगा कि 'मेडलिस्ट पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है प्यार से, मेहनत से, लगन से….'। इस फिल्म की ये एक लाइन अपने आप में सारे दर्द बयां कर जाती है। बाप-बेटी के रिश्ते पर बनी ये फिल्म उनके प्यार, तकरार और फटकार तक सब कुछ दिखाती है।

 

एक्टिंग

आमिर खान को परफेक्शनिस्ट क्यों कहा जाता है, इस बात का जवाब आपको यह फिल्म देखने के बाद पता चल जायेगा। इस फिल्म में सिर्फ आमिर खान परफेक्ट नहीं बल्कि उन्हीं की तरह इन चारों छोरियों ने भी अपना परफेक्शन दिखलाया है। इस रोल के लिए इन्होंने कई महीनों तक ट्रेनिंग ली है और वो मेहनत पर्दे पर साफ झलकती है।

 

इस फिल्म में गीता और बबीता के बचपन का रोल जायरा वसीम और सुहानी भटनागर ने किया है तो वहीं बड़े होने के बाद की भूमिका फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा ने किया है। ज़ायरा ने गीता की भूमिका को मजबूती दी है तो फातिमा ने उसे दमदार बना दिया है। ज़ायरा अपने रौबदार एडिट्यूड से गीता की भूमिका को और भी धाकड़ बना देती हैं।

 

इस फिल्म में साक्षी तंवर ने आमिर खान की पत्नी का किरदार निभाया है। इस फिल्म में सांक्षी तवर के पास जितना कुछ भी है उन्होंने अच्छा किया है। इसमें महावीर सिंह फोगट के भतीजे की भूमिका में अपारशक्ति खुराना ने जान भर दी है।

 

निर्देशन

इस फिल्म को ज्यादा फिल्मी ना बनाते हुए डायरेक्टर नितेश तिवारी ने इस फिल्म को परदे पर ऐसे दिखाया है कि फिल्म के हर सीन, हर एक्सप्रेशन और सारे डायलॉग सब परफेक्ट है। नितेश तिवारी की दंगल फिल्म पहलवानी के इर्द गिर्द ही घूमती है और कहीं भी उससे नहीं हटती है। ये डायरेक्टर की चतुराई ही है कि फिल्म में रेसलिंग की कुछ बारीक बातें ऐसे बता दी गई है जिससे दर्शकों को भी समझने में परेशानी ना हो, जैसे कि रेसलिंग में कब कितने प्वाइट्स मिलते हैं। फिल्म में बारीक चीजों पर भी मेहनत की गई है ताकि सीन परफेक्ट बनाया जा सके।

 

म्यूजिक

इस फिल्म में प्रीतम ने म्यूजिक दिया है और अमिताभ भट्टाचार्य ने गानों के बोल लिखे हैं। फिल्म के सारे गाने बहुत ही अच्छे हैं। फिल्म के यह गाने 'हानिकारक बापू', 'धाकड़' और 'गिल्हेरियां' पहले ही पॉपुलर हो चुके हैं। अरिजित सिंह की आवाज में एक गाना है 'नैना' जो शायद आपको रुला सकता है।

 

फिल्म देखने जाएँ या नहीं

इस फिल्म में महावीर सिंह फोगट के जैसा दिखने में आमिर ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। यह फिल्म एक महावीर सिंह फोगट के संघर्ष, गीता-बबीता के मेहनत और लगन की कहानी दिखाने के साथ-साथ समाज में एक संदेश भी दे जाती है कि अब छोरिया किसी मामले में कम नहीं हैं, जैसा कि फिल्म में एक डायलॉग भी है 'गोल्ड तो गोल्ड होता है छोरा लावे या छोरी…'। तो आप दंगल फिल्म जरुर देखने जाएँ। फिल्म देखने जाने से पहले आप इस लिंक पे क्लिक करके ट्रेलर, गाने और लिरिक्स देख सकते हैं-

 

फिल्म का ट्रेलर, गाने और लिरिक्स देखने के लिए यहाँ क्लिक करें–




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